गांवों की कमाई पर महंगाई की मार, नाबार्ड सर्वे ने दिखाई नई तस्वीर
नई दिल्ली: ग्रामीण भारत में आमदनी की रफ्तार में आ रही सुस्ती का असर अब परिवारों की बचत, रोजगार और भविष्य के वित्तीय भरोसे पर साफ दिखने लगा है। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के जुलाई 2026 के ताजा सर्वेक्षण में देशभर के 20,000 ग्रामीण परिवारों से प्राप्त डेटा के अनुसार 52.6% परिवारों ने माना कि पिछले एक वर्ष में उनकी आय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई, जबकि 19.8% परिवारों की कमाई में गिरावट दर्ज की गई। महज 27.7% परिवारों ने आय वृद्धि की बात स्वीकार की है, जो सितंबर 2024 में शुरू हुए सर्वे के बाद से न्यूनतम स्तर पर है। इसके बावजूद दैनिक जीवन से जुड़े घरेलू खर्चों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है।
घरेलू खर्च में लगातार वृद्धि और मासिक बजट पर पड़ता दबाव
कमाई की सुस्त चाल के बाद भी ग्रामीण इलाकों में घरेलू खर्चों का ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ा है। सर्वे में शामिल 74.1% उत्तरदाताओं ने स्वीकार किया कि बीते एक वर्ष के दौरान उनके उपभोग व्यय में बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार औसतन एक ग्रामीण परिवार अपनी कुल मासिक कमाई का 66.5% हिस्सा भोजन व रोजमर्रा के उपभोग पर खर्च कर देता है। इसके विपरीत बचत के खाते में केवल 13.6% हिस्सा ही जा पाता है, जबकि मासिक आय का 12.5% हिस्सा पुराने लिए गए कर्जों की किश्तें चुकाने में निकल जाता है।
भविष्य की कमाई और रोजगार के अवसरों को लेकर घटता भरोसा
आने वाले महीनों को लेकर भी ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। सर्वे के अनुसार अगले तीन महीनों के दौरान रोजगार के बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद जताने वाले परिवारों का आंकड़ा घटकर 39.3% पर आ गया है। इसके साथ ही आगामी तिमाही में अपनी आय में सुधार की संभावना देखने वाले परिवारों का प्रतिशत भी सिमटकर 41.2% रह गया है, जो अब तक की सबसे कम दर है। हालांकि जब एक साल के दीर्घकालिक नजरिए की बात आती है, तो लगभग 69.6% परिवार आय बढ़ने के प्रति आशान्वित दिखते हैं।
बढ़ती महंगाई की आशंका से ग्रामीण इलाकों में बढ़ रही चिंता
कीमतों में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव ने ग्रामीण परिवारों के बजट को और अधिक असहज कर दिया है। जुलाई 2026 के इस सर्वे में ग्रामीणों ने अगले एक वर्ष के दौरान औसतन 5.8% महंगाई दर रहने का अनुमान व्यक्त किया है। यह आंकड़ा मार्च 2026 के सर्वे में लगाए गए 4.4% के अनुमान से काफी अधिक है। आय में सीमित बढ़ोतरी के बीच महंगाई का यह बढ़ता हुआ डर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है, क्योंकि परिवारों की क्रय शक्ति सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है।
अनौपचारिक ऋण चक्र और ग्रामीण परिवारों का वित्तीय संतुलन
वित्तीय तंत्र की पहुंच के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण का दबाव बना हुआ है। सर्वेक्षण से उजागर हुआ है कि लगभग 23.6% ग्रामीण परिवार आज भी अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर हैं। सीमित बचत और बढ़े हुए उपभोग खर्च के कारण अनौपचारिक कर्ज की यह निर्भरता आने वाले समय में ग्रामीण परिवारों की वित्तीय स्थिति और जीवन स्तर पर गहरा असर डाल सकती है।


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