60 दिन नियम को लेकर अमेरिका में बहस तेज, ईरान युद्ध बना वजह
वॉशिंगटन: अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे सैन्य अभियान ने अब व्हाइट हाउस और कैपिटल हिल (अमेरिकी संसद) के बीच एक बड़ा संवैधानिक गतिरोध पैदा कर दिया है। 1973 के वॉर पावर्स रिजोल्यूशन (War Powers Resolution) की 60 दिनों की समयसीमा खत्म होने के करीब है, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने कांग्रेस (संसद) से मंजूरी लेने की किसी भी योजना से इनकार कर दिया है। सीनेट की सुनवाई के दौरान रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और डेमोक्रेटिक सांसदों के बीच तीखी बहस हुई, जिसने अमेरिकी सैन्य नीतियों और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
60 दिन की समयसीमा और 'सीज़फायर' की ढाल
1973 के कानून के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति को किसी भी सैन्य अभियान की शुरुआत के 60 दिनों के भीतर कांग्रेस से औपचारिक अनुमति लेनी पड़ती है। इस कानून का उल्लंघन करने पर सैन्य कार्रवाई को रोकना पड़ता है। हालांकि, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने एक नई कानूनी व्याख्या पेश करते हुए कहा कि क्योंकि क्षेत्र में वर्तमान में 'युद्धविराम' (Ceasefire) जैसी स्थिति है, इसलिए यह 60 दिन की कानूनी घड़ी प्रभावी रूप से रुक गई है।
विरोध: वर्जीनिया के सीनेटर टिम केन ने इस तर्क को 'कानूनी आधारहीनता' करार दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रशासन कानून की अपनी सुविधानुसार व्याख्या कर रहा है, जो भविष्य के लिए एक खतरनाक मिसाल बन सकता है।
नागरिक हताहतों और AI हथियारों पर सवाल
सुनवाई के दौरान एक लड़कियों के स्कूल पर हुए कथित हमले का मुद्दा भी गरमाया, जिसमें 170 से अधिक लोगों की मौत का दावा किया गया है। सांसदों ने पूछा कि क्या अमेरिकी तकनीक का इस्तेमाल नागरिकों को निशाना बनाने के लिए हुआ?
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रक्षा मंत्रालय का पक्ष: पीट हेगसेथ ने कहा कि पेंटागन AI-सहायता प्राप्त लक्ष्य प्रणाली का उपयोग कर रहा है, जिसमें मानवीय निगरानी (Human Oversight) भी शामिल है ताकि नागरिक हताहतों की संख्या कम की जा सके।
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जनता का समर्थन: सीनेटर क्रिस्टन गिलिब्रैंड ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिकी जनता ईरान के साथ एक और लंबे युद्ध के पक्ष में नहीं है। उन्होंने इस बात पर भी संदेह जताया कि इस अभियान से अमेरिका पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित हुआ है।
ट्रंप की स्पष्टोक्ति: "यह युद्ध नहीं, सर्जिकल स्ट्राइक है"
इस पूरे विवाद के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चिरपरिचित अंदाज में इस संघर्ष को नया नाम दिया है। ट्रंप ने इसे 'युद्ध' मानने से इनकार करते हुए 'सैन्य अभियान' करार दिया। व्हाइट हाउस से जारी बयानों के अनुसार:
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ईरान की हालत: ट्रंप का दावा है कि उनकी "मैक्सिमम प्रेशर" नीति और सैन्य प्रहारों से ईरान की नौसेना और वायुसेना लगभग ध्वस्त हो चुकी है।
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आर्थिक घेराबंदी: ट्रंप के अनुसार, कड़े प्रतिबंधों और नाकाबंदी के कारण ईरान की तेल से होने वाली कमाई शून्य के करीब पहुंच गई है।
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समझौते की संभावना: राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान अब समझौते के लिए "बेताब" है और अमेरिकी कार्रवाई ने मध्य पूर्व में एक बड़े नरसंहार को रोक दिया है।
फिलहाल, यह मामला कानूनी मोड़ ले चुका है। यदि प्रशासन और कांग्रेस के बीच सहमति नहीं बनती, तो यह विवाद अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच सकता है। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या ट्रंप प्रशासन 60 दिन की समयसीमा के बाद भी बिना संसदीय मंजूरी के ईरान पर दबाव जारी रख पाएगा।


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